सिविल सेवा में लगभग 25 सेवाएं हैं

 सिविल सेवा परीक्षा में लगभग 25 सेवाएं हैं, लेकिन हर कोई आईएएस ही क्यों बनना चाहता है, क्या इससे बाकी सेवाओं की उपेक्षा नहीं होती है?


(1.)आईएएस अधिकारी सरकारी नीतियों के निर्धारण एवं क्रियाकलापों के सम्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


(2.)आईएएस अफसर का सीधा पब्लिक डीलिंग और राजनेताओं से वास्ता पड़ता है।या कह लीजिए कि पब्लिक और राजनेताओं को आईएएस से रोजाना कोई न कोई काम पड़ता है।


(3.)आईएएस अफसर को बहुत चुनौतीयों तथा कठिनाइयों से सामना करना पड़ता है।


(4.) इसलिए यह भारत की सबसे सम्माजनक सेवाओं में से है, फलस्वरूप आज हर युवा भारतीय सेवाओं में से आईएएस में भागीदार बनना चाहता है।


(5.)वास्तव में यह इतनी 'ग्लैमरस ' और चुनौतीपूर्ण सेवा है कि युवाओं में इसकी चयन परीक्षा को लेकर एक जुनून-सा देखा जाता है।


(6.)आईएएस में उत्तीर्ण अभ्यर्थी विभिन्न मंत्रालयों में सचिव या जिलों में जिलाधीश अथवा अन्य विभागों में उच्च पदो पर नियुक्त किये जाते हैं। जहां उनको अपनी सम्पूर्ण मानसिक और शारीरिक क्षमता का सदुपयोग करने का अवसर प्राप्त होता है।


(7.) इसके साथ-साथ अच्छा वेतन और पावर भी मिलता है।


(8.) आईएएस अधिकारी को हर क्षण ऐसे कार्यों को अन्जाम देना होता है,जिसकी सफलता-असफलता उसकी क्षमता पर निर्भर करती है और उसे ही अंतिम निर्णय लेना होता है।


इन्हीं सब कारणों से अधिकांश अभ्यर्थी आईएएस सेवा ही चयन करते हैं।


इससे बाकी सेवाओं की उपेक्षा न होने के कुछ कारण निम्न है-


(1.)हर अभ्यर्थी को उसकी क्षमता, योग्यता के अनुसार सेवाओं का बंटवारा होता है।


(2.) सेवाओं को चयन करने का विकल्प अभ्यर्थी को दिया जाता है। परन्तु हर अभ्यर्थी को उसकी क्षमता व योग्यता के अनुसार सेवा का आंवटन किया जाता है।


(3.) सिविल सेवाओं के बढ़ते क्रेज के कारण ही इसकी चयन प्रक्रिया भी कठिन से कठिनतर होती जा रही है।


(4.) यदि आईएएस अधिकारी के पद पर किसी अध्यापक को नियुक्त कर दिया जाए या अपात्र अभ्यर्थी का चयन कर लिया जाए तो क्या वह उस पद पर ठीक से काम कर पाएगा?80%-90% इसका उत्तर नहीं में ही आएगा।


(5.)यदि अपात्र अभ्यर्थी को आईएएस अधिकारी के लिए नियुक्त कर दिया जाता है तो वह उस पद के साथ न्याय नहीं कर पाता है।ऐसे आईएएस अधिकारी को अमहत्त्वपूर्ण विभाग या पद पर नियुक्त कर दिया जाता है।क्योंकि आईएएस अधिकारी के काबिल अभ्यर्थी है भी या नहीं उसकी असली परीक्षा तो फील्ड में पोस्टिंग करने के बाद ही होती है।


(6.)आईएएस ही क्या आप प्रधानमंत्री के पद को ही ले लीजिए।यदि अपात्र कन्डीडेट को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया गया है तो देश को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए भारत की जनता भी अब सोच समझकर ही वोट डालती है। फिर भी यदि गलत व्यक्ति प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त हो जाता है तो उसका नुकसान जनता तथा देश को उठाना पड़ता है। क्योंकि जनता प्रधानमंत्री का सीधा चयन नहीं करती है। उसे केवल एमपी का चुनाव करना होता है।


(7.)इसी प्रकार आईएएस अधिकारी के पद पर गलत अभ्यर्थी का चयन हो जाता है तो उसका नुकसान जनता व राजनेताओं तथा देश को उठाना पड़ता है।क्योंकि एक आईएएस की असली परीक्षा तो फील्ड में ही होती है। वहीं पर पता चलता है कि वो अभ्यर्थी उस आईएएस अधिकारी के पद के लायक हैं या नहीं।

Follow me for upsc relatded any problem Sachin Mishra


👏

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सिविल सेवा क्यों पंसद करते हैं लोग

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य चर्चा में क्यों

असमंजस में डाल देने वाला पोस्ट जरूर पढें