यूपीएससी तैयारी के लिये टिप्स


 IAS Preparation Tips:आईएएस की ऑनलाइन कोचिंग ले रहे हैं, क्‍या इन चुनौतियों के बारे में सोचा है

IAS Preparation Tips: आईएएस परीक्षा की तैयारी के लिये ऑनलाइन सामग्री उपलब्‍ध तो है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. अगर आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी ऑनलाइन करना चाहते हैं तो आपको इन चुनौतियों के बारे में मालूम होना चाहिए.

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IAS Preparation Tips:  आप चाहें या न चाहें, लेकिन अब भविष्य की शिक्षा ऑनलाइन होने जा रही है. इसका अर्थ यह नहीं कि भौतिक कक्षाएं समाप्त ही हो जाएंगी. लेकिन यह जरूरी है कि यदि आपको अपने शिक्षा का दायरा और उसका स्तर ऊंचा उठाना है, तो ऑनलाइन लैक्चर का सहारा लेना ही पड़ेगा. यह बात तब तो और भी जरूरी हो जाती है, जब आपकी परीक्षा में सफलता का आधार कोई प्रतियोगी परीक्षा हो. जाहिर है कि वह परीक्षार्थी दूसरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा, जिसके अध्ययन का दायरा ऑनलाइन ज्ञान का होगा. यहां जब मैं ऑनलाइन ज्ञान की बात कर रहा हूं, तो इसे केवल ऑनलाइन क्लासेस तक सीमित करके न देखें. बल्कि ज्ञान के उन सभी कोष तक होने वाली पहुंच के रूप में देखें, जहां आप ऑनलाइन के जरिए पहुंच सकते हैं.

बड़ी बात यह है कि इसकी कोई सीमा नहीं है. यहां आप दुनिया के सबसे ज्ञानी लोगों से लेकर, सामान्य लोगों के विचारों तक को जान सकते हैं. इसलिए इसके प्रति आपको अपना रवैया सकरात्मक बनाना ही चाहिए. लेकिन यदि आपने अपना रवैया सकारात्मक बना भी लिया, तो उसे निभाना इतना आसान नहीं होगा. सुनने में ऑनलाइन क्लासेस इस मायने में बहुत सुविधाजनक लगती है कि आप बहुत कम फीस में अपनी सुविधानुसार अपने ही घर में बैठकर या कहीं भी आते-जाते हुए इसे सुन सकते हैं. लेकन इससे जुड़ी कुछ बातें ऐसी हैं, जो आपको ये सारी सुविधाएं देने के साथ-साथ आपके सामने कुछ जबर्दस्त चुनौतियां भी प्रस्तुत करती हैं. अपने तथा दूसरों के अनुभव के साथ-साथ इस पर किए गए विभिन्‍न अध्ययनों के आधार पर मैं अब इससे जुड़ी कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों से आपको परिचित करना चाह रहा हूं.

ऑनलाइन पढ़ाई की बड़ी चुनौतियां:


पहली चुनौती: इसकी सबसे बड़ी और यहां तक कि सबसे खतरनाक चुनौती इसकी सबसे बड़ी ताकत से ही जुड़ी हुई है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि आप अपनी सुविधानुसार इसका कभी भी उपयोग कर सकते हैं. इसका ‘कभी भी’ शब्द इतना बड़ा ‘लूपहोल’बनाया गया है कि लोग इसे उपयोग में ला ही नहीं पाते. चूंकि उन्हें यह लगता रहता है कि इसे कभी भी सुना जा सकता है, वे इसे टालते रहते हैं. आखिर में कुल-मिलाकर नतीजा यह निकलता है कि वे सुन ही नहीं पाते और आगे चलकर कुछ दिनों के बाद इसे छोड़ ही देते हैं.

जबकि भौतिक रूप से लगने वाली क्लासेस का समय निर्धारित होता है. यदि आप उसमें नहीं जा पाते, तो फिर उसे हमेशा-हमेशा के लिए खो देते हैं. यहां चूंकि किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं रहती है, इसलिए आप इसके बारे में ढिलाई ले लेते हैं और इस प्रकार आप अपना सबसे बड़ा नुकसान कर बैठते हैं. इसलिए ऑनलाइन क्लासेस लेने के बारे में फैसला करते समय आपको सबसे पहले इस बात का फैसला करना चाहिए कि मैं इस अनुशासन को निभा पाऊंगा/पाऊंगी या नहीं. यदि आप इसे निभा ले जाते हैं, तो यह आपके लिए वरदान बन सकता है.


दूसरी चुनौती: दूसरी चुनौती कंसनट्रेशन की है. आमतौर पर लोग इसे एक प्रकार का इंटरटेनमेंट समझकर खाली वक्त में किया जाने वाला काम मान लेते हैं. यानी कि इसे क्वालिटी टाइम नहीं देते. इसका परिणाम यह होता है कि जिस तरह से इसका उपयोग किया जाना चाहिए वह नहीं होता. दिमाग में बातें उस तरह से नहीं बैठ पातीं. कुछ समय बाद यह आपको बेकार सा लगने लगता है.


तीसरी चुनौती: इसकी तीसरी सबसे बड़ी चुनौती प्रश्‍न-उत्‍तर शैली की है. यदि आपको लैक्चर की कोई बात ठीक से समझ में नहीं आ रही है, तो आप प्रश्‍न पूछकर तुरन्त उसका समाधान नहीं पा सकते. बहुत से संस्थानों ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं. लेकिन समाधान तत्काल नहीं मिल सकता.

इस पर भी आपको विचार करना चाहिए. लेकिन यहां मैं एक बात विशेष रूप से बताना चाहूंगा कि क्‍योंकि लैक्चर देने वाला इस तरह की समस्याओं से परिचित रहता है, इसलिए वह पहले से ही अपने लैक्चर को इस तरह प्रस्तुत करने की हरसंभव कोशिश करता है, ताकि इस तरह की अस्पष्टता या भ्रम की स्थिति आये ही नहीं.

अंतिम चुनौती: आपके अपने मनोविज्ञान की होती है अंतिम चुनौती. वह यह कि क्या आपको स्क्रीन पर किसी को देखकर पढ़ने की आदत है? क्या आप अकेले में बैठकर ध्यानपूर्वक किसी को सुन सकते हैं? क्या आपका अपने ऊपर इतना नियंत्रण है कि आप इस दौरान होने वाली बोरियत से खुद को बचा सकते हैं?

वैसे यहां मैं फिर से एक बात कहना चाहूंगा कि यदि इन सबके बारे में आपका उत्तर ‘नहीं’ है, तो आप इसे ‘हां’ में बदल सकते हैं. दरअसल, यह केवल एक आदत भर की बात है. यदि आप कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करते रहेंगे, तो यह सिस्टम आपकी आदत में शामिल हो जाएगा. फिर न केवल आपको इस बात की शिकायत ही नहीं रह जाएगी, बल्कि यह आपकी प्राथमिकता बन जाएगी. ऐसा होते ही आपके सामने ज्ञान का अनन्त आकाश उपस्थित हो जाएगा.

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